Saturday, 14 February 2015

सुलह न करें तो मुशरिकों को घात लगाकर कत्ल करो

अभी पिछले दिनों हैदराबाद की राजनीक पार्टी मजलिस-ऐ-इत्तिहादुल-मुस्लिमीन के मुखिया श्रीमान अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हर बच्चा जन्म से ही मुसलमान होता है एवं बाद में उसका धर्म परिवर्तन किया जाता है। श्रीमान ओवैसी को यह ज्ञात नहीं की संसार के सभी धर्मो के अनुयायी मूल रूप से हिन्दू व्यवस्था में ही जन्म लेते है। हिन्दू-सनातन धर्म के लिये व्यक्ति की किसी भी प्रकार की काट छांट नहीं की जाती, जबकि  वह व्यक्ति यहूदी, ईसाई एवं मुस्लिम एक निश्चित विधिविधान के पश्चात ही उस धर्म समुदाय का अनुयाई बन पाता है।
उदाहरण के लिए एक मुसलमान परिवार में जन्म लेने के पश्चात मुस्लिम विधान के अनुरूप बच्चे के कान में अजान पढ़ कर उसको मुस्लिम बनने के लिये तैयार किया जाता है और उसके पश्चात् सुन्नत अर्थात खतना किया जाता है, जिसके बाद वह मुसलमान बन जाता है।
इसके ठीक विपरीत सनातन व्वस्था के अनुसार किसी व्यक्ति की हिन्दू धर्माधिकारी बनने के लिए यह अनिवार्य है कि उस का जन्म जात कोई अंग भंग न हो, यदि दुर्भाग्यवश से किसी हिन्दू का कोई अंग भंग हो गया तो वह शंकराचार्य जैसे सम्मानित पद का अधिकारी नहीं  बन सकता।
पवित्र कुरान में सुरः-२ अल–बकरह की आयत-२ में लिखा है कि “इसमें कोई शक नहीं कुरान राह दिखाती है…डर रखने वालों को जो यकीन करते है, बिन देखे” कुरान के मतानुसार कुरान उन लोगों का मार्गदर्शन करती है, जो लोग डरते हैं। कमाल की बात यह है कि तर्क के आधार पर एक व्यक्ति को यह जानने का अधिकार नहीं कि वह यह जाने की लिखित तथ्य तर्क के आधार पर सत्य हैं अथवा नहीं।
इसी प्रकार कुरान में यह सन्देश उल्लेखित है कि तुम ईमान लाओ जिस से तुम मुसलमान बन सको, तथा जो लोग खुदा से नहीं डरते खुदा उनको गुमराह या अँधेरे में धकेल देता है। इसके ठीक विपरीत हिन्दू धर्म में किसी को डराकर हिन्दू बनने के लिए प्रेरित नहीं किया जाता। हिन्दू जन्म से ही हिन्दू होता है, उसे भय दिखा कर हिन्दू अथवा सनातनी नहीं बनाया जा सकता। इस्लाम में खुदा स्वयं लोगों को डरा कर मुस्लिम बनने पर  मजबूर करता है तथा इससे भी अधिक खुदा स्वयं कुरान में जन्नत का ख्वाब दिखा कर मुस्लिम बनने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए, ईमान खुदारसूल एवम कुरान पर रखने से ही कोई व्यक्ति मुसलमान हो सकता है। इसीलिए खुदा खुद ही कुरान में बार बार कहा करता है कि मुस्लिम बनो। कुरान की सुरह–८-अन–अनफ़ाल आयत–१ के अनुसार “पस (सिर्फ) तुम लोग अल्लाह से डरो और अपने आपस के ताल्लुकात की इस्लाह [सुधार] करो और अल्लाह और उसके रसूल कीइतायत [आज्ञापालन] करो और अगर तुम ईमान रखते हो…”।
इस के विपरीत हिन्दू-सनातन व्यवस्था में व्यक्ति को किसी प्रकार डरा कर या प्रलोभन दे कर हिन्दू-सनातनी नहीं बनाया जाता।
कुरान के मतानुसार जब कोई व्यक्ति मुस्लिम बनने को तैयार नहीं, तब खुदा उस व्यक्ति के विरुद्ध आदेश देता है— सूरह ८–अल–अनफ़ाल आयत १२ के अनुसार—“रब ने फरिश्तों को हुकुम भेजा कि– मैं तुम्हारे साथ हूँ, तुम ईमान वालों को जमाए रखो मैं मुंकिरों के दिल में रोब डाल दूंगा, पस तुम उन की गर्दन के ऊपर मारो और उनके पोर पोर पर ज़र्ब [चोट] लगाओ” | इसी प्रकार खुदा आदेश देता है, सुरह–९–अत–तैबह-२—“तुम जमींन में चार महीने चल फिर लो, और जान लो कि तुम अल्लाह को अजीज़ न कर सकोगे, और अल्लाह काफिरों को अपमानित करने वाला है”।
खुदा ने मुशरिकों (बहुदेव् वादियों) के विषय में आदेश दिया कि अगर वे तुम से सुलह  कर लें तो ठीक, अन्यथा तुम उन के विरुद्ध “फिर जब हुरमत वाले दिन गुजर जाये तो तुम मुशरिकों को जहाँ कहीं पाओ (अर्थात काबे के पास ही क्यों न हो) क़त्ल करो। उन्हें पकड़ो, और घेरो और हर घात की जगह उनकी ताक में बैठो, फिर अगर वे  तौबा कर लें और नमाज़ कायम करे, और ज़कात दे, तो उन का रास्ता छोड़ दो, बेशक अल्लाह माफ़ करने वाला है।”
हिन्दू-सनातन धर्म कभी किसी को किसी प्रकार भी डरा धमका कर हिन्दू धर्म का पालन करने के लिए बाध्य नहीं करता। हिन्दू धर्म की किसी व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति की हत्या की अनुमति अपने विचार से सहमत अथवा असहमत होने के आधार पर नहीं दी जाती और न ही किसी व्यक्ति को हिन्दू बनने का प्रलोभन दिया जाता है।
इसके विपरीत इस्लाम में अल्लाह उन लोगों को डराता है, जो डरकर खुदा रसूल और कुरान एवं इस्लाम के मूल भूत सिद्धांतों पर विश्वास करते हैं, सूरह – २२ – अल –हज – आयात – ४९ के अनुसार “कहो कि ऐ लोगो मैं तुम्हारे लिए एक खुला हुआ डराने वाला हूं।”
जो लोग कुरान के सत्य को स्वीकार नहीं करते उस के विषय में वर्णन है सूरह १८ – अल कहफ़ – ५७ के अनुसार “हमने उनके दिलों पर पर्दे डाल दिए कि इसे न समझ सके और कानो में डाट लगा दिये।” अर्थात खुदा उनकी बौद्धिक, शारीरिक शक्ति समाप्त कर देता है जो लोग कुरान के अनुसार नहीं चलते हैं, किसी  भी व्यक्ति की अपनी बौद्धिक समझ नहीं होती, सब अल्लाह डरा कर बनाता है।
सूरह – २८ –अल कसस आयत -५० के अनुसार “निसंदेह खुदा ज़ालिम लोगो को मार्ग नहीं दिखाता”।
सनातन-हिन्दू जन्म से होता है। उसे किसी नियति से हिन्दू नहीं बनाया जा सकता। यह मनुष्य के अपने संस्कार होते हैं कि वह आदर्श व्यक्ति बन कर मानव समाज की सेवा धर्म के अनुसार करे। हिन्दू में जन्म के पश्चात भगवान किसी को डरा कर बाध्य नहीं करता, इससे भी अधिक मनुष्य को यह स्वतन्त्रता है कि वह अपना मार्ग स्वयं निश्चित करे तथा अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी विचारधारा को चुने। हिन्दू धर्म के बताये मार्ग पर नहीं चलने के कारण किसी को यह अधिकार नही कि कोई धर्माधिकारी उस व्यक्ति को हिन्दू धर्म की मान्यताओं का पालन न करने पर हत्या करने के लिये उसके  गर्दन पर हत्या के इरादे से हमला करे, जिससे डरकर वह हिन्दू बन जाये। यदि हिन्दू बनने की कोई सामान्य व्यवस्था होती तो कोई भी हिन्दू किन्हीं निश्चित मान्यताओं को पूर्ण कर हिन्दू बन जाता तथा हिन्दू समाज आसानी से किसी को भी हिन्दू बना कर मान्यता दे देता। पवित्र हिन्दू मान्यता किसी को भी चाहे वह किसी भी धर्म में जन्मा हो हिन्दू बनने के लिये प्रेरित नहीं करती।
इसके ठीक विपरीत मुसलमान किसी भी व्यक्ति को प्रेरित कर मुसलमान बनाते हैं, चाहे वह व्यक्ति किसी भी प्रकार की विकृत मानसिकता का ही क्यों न हो, मुस्लिम समाज द्वारा किसी भी मनुष्य को मुस्लिम बनाने के लिये जमात द्वारा अभियान चलाया जाता है तथा अलग-अलग तरह के प्रलोभन दे कर मुस्लिम बनाने के लिये धन शक्ति एवं सत्ता का बल प्रयोग किया जाता है।

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